Old Pension Scheme: भारत में ओल्ड पेंशन स्कीम, जिसे OPS कहा जाता है, लंबे समय तक सरकारी कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा की रीढ़ रही है। इस योजना के तहत रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को एक निश्चित और भरोसेमंद मासिक पेंशन मिलती थी। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए खास थी जिन्होंने अपनी पूरी नौकरी सरकार की सेवा में बिताई। OPS ने बुजुर्ग कर्मचारियों को आर्थिक चिंता से काफी हद तक मुक्त रखा।
सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन केवल आमदनी का साधन नहीं थी, बल्कि यह सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक भी मानी जाती थी। OPS ने यह भरोसा दिया कि रिटायरमेंट के बाद जीवन अचानक अस्थिर नहीं होगा। यही कारण है कि आज भी बहुत से कर्मचारी इस योजना को भावनात्मक रूप से याद करते हैं।
ओल्ड पेंशन स्कीम क्या थी
ओल्ड पेंशन स्कीम एक डिफाइन्ड बेनिफिट रिटायरमेंट योजना थी, जिसमें पेंशन की राशि पहले से तय होती थी। रिटायरमेंट के समय कर्मचारी को उसकी आखिरी सैलरी का लगभग आधा हिस्सा पेंशन के रूप में दिया जाता था। इसके साथ महंगाई भत्ता भी समय-समय पर जोड़ा जाता था। यह पेंशन पूरी जिंदगी मिलती थी।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि कर्मचारी को बाजार के उतार-चढ़ाव की चिंता नहीं करनी पड़ती थी। पेंशन की राशि सरकार की जिम्मेदारी होती थी, न कि किसी निवेश पर निर्भर। इससे बुजुर्गों को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की स्थिरता मिलती थी।
OPS की कार्यप्रणाली और सुरक्षा
OPS के तहत पेंशन पाने वाले व्यक्ति को हर महीने एक तय राशि मिलती थी। सरकार हर साल अपने बजट से पेंशन का भुगतान करती थी। इसमें किसी तरह का व्यक्तिगत निवेश या शेयर बाजार से जुड़ा जोखिम नहीं होता था। यही वजह थी कि इसे सुरक्षित योजना माना जाता था।
इस स्कीम में फैमिली पेंशन का भी प्रावधान था। अगर पेंशनर की मृत्यु हो जाती थी, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन मिलती रहती थी। इससे परिवार को भविष्य की आर्थिक असुरक्षा से बचाया जाता था। यह सुविधा कर्मचारियों के लिए बहुत भरोसेमंद मानी जाती थी।
OPS को बदलने का फैसला क्यों लिया गया
समय के साथ OPS सरकार के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ बनती चली गई। हर साल पेंशन खर्च बढ़ता गया, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों के बजट पर दबाव पड़ने लगा। बढ़ती उम्र और कर्मचारियों की संख्या के कारण यह खर्च लगातार बढ़ रहा था।
इसी वजह से 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती होने वाले कर्मचारियों के लिए OPS को बंद कर दिया गया। इसकी जगह नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS को लागू किया गया। सरकार का उद्देश्य पेंशन व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना था।
नेशनल पेंशन सिस्टम का आगमन
NPS एक डिफाइन्ड कॉन्ट्रिब्यूशन योजना है, जिसमें कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं। इस योजना में रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन बाजार में किए गए निवेश पर निर्भर करती है। यानी पेंशन की राशि पहले से तय नहीं होती।
इस सिस्टम का मकसद सरकारी खजाने पर बढ़ते पेंशन खर्च को नियंत्रित करना था। हालांकि इससे सरकार को राहत मिली, लेकिन कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना भी बढ़ी। बाजार के जोखिम के कारण कई कर्मचारी इसे OPS जितना सुरक्षित नहीं मानते।
OPS बनाम NPS की तुलना
OPS में पेंशन की राशि तय और गारंटीड होती थी, जबकि NPS में यह अनिश्चित होती है। OPS में पूरा खर्च सरकार उठाती थी, वहीं NPS में कर्मचारी को भी योगदान देना पड़ता है। यही फर्क दोनों योजनाओं को लेकर बहस की जड़ है।
कई कर्मचारियों का मानना है कि सरकारी सेवा के बदले उन्हें सुरक्षित पेंशन मिलनी चाहिए। वहीं सरकार का तर्क है कि OPS लंबे समय में आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं है। इसी वजह से दोनों पक्षों के बीच लगातार मतभेद बना हुआ है।
2026 में पेंशन को लेकर चल रही बहस
हाल के वर्षों में OPS को लेकर देश में फिर से बहस तेज हो गई है। कई कर्मचारी संगठन और यूनियन सरकार से पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि NPS में रिटायरमेंट के बाद भविष्य अनिश्चित हो जाता है।
कुछ राज्य सरकारों ने इस दिशा में अपने स्तर पर कदम उठाए हैं। उन्होंने OPS जैसे या हाइब्रिड मॉडल वाली पेंशन योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं में पेंशन की एक न्यूनतम गारंटी दी जाती है, जिससे कर्मचारियों को कुछ हद तक सुरक्षा मिलती है।
केंद्र सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि पूरे देश में OPS को वापस लाना फिलहाल संभव नहीं है। इसके पीछे कानूनी और वित्तीय दोनों तरह की सीमाएं बताई गई हैं। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में बजट पर भारी दबाव पड़ेगा।
हालांकि सरकार यह भी संकेत दे चुकी है कि पेंशन सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। ऐसे मॉडल पर चर्चा हो रही है जिसमें सुरक्षा और स्थिरता दोनों का संतुलन हो। यह बहस अभी जारी है।
OPS जैसी योजनाओं से किसे फायदा होता है
OPS और इससे मिलती-जुलती योजनाओं का सबसे ज्यादा फायदा रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों को होता है। उन्हें हर महीने एक तय और भरोसेमंद आय मिलती है। इससे उन्हें बाजार की अस्थिरता की चिंता नहीं रहती।
फैमिली पेंशन जैसी सुविधाएं भी इन योजनाओं को खास बनाती हैं। इससे पेंशनर के परिवार को भी आर्थिक सुरक्षा मिलती है। यही वजह है कि कर्मचारी OPS को सामाजिक सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था मानते हैं।
ओल्ड पेंशन स्कीम भले ही आज नई भर्तियों पर लागू न हो, लेकिन इसकी अहमियत अब भी बनी हुई है। यह योजना सरकारी कर्मचारियों के लिए आर्थिक स्थिरता और सम्मान का प्रतीक रही है। आज की बहस इसी सुरक्षा को दोबारा पाने की कोशिश को दिखाती है।
भविष्य में पेंशन व्यवस्था किस दिशा में जाएगी, यह नीति निर्माताओं के फैसलों पर निर्भर करेगा। लेकिन इतना साफ है कि OPS की भावना आज भी करोड़ों कर्मचारियों और रिटायर लोगों के दिलों में जिंदा है।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और समझ के उद्देश्य से लिखा गया है। पेंशन से जुड़े नियम, नीतियां और योजनाएं समय-समय पर बदल सकती हैं। किसी भी निर्णय से पहले संबंधित सरकारी अधिसूचना या आधिकारिक स्रोत से जानकारी की पुष्टि जरूर करें।









