टैक्सपेयर्स की बल्ले-बल्ले! बजट में New Tax Regime पर होगा बड़ा ऐलान! Budget 2026

By Meera Sharma

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Budget 2026
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Budget 2026: 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट को लेकर देशभर के टैक्सपेयर्स में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। खासतौर पर मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोग इस बजट से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। सभी की नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं कि क्या इस बार न्यू टैक्स रिजीम में ऐसे बदलाव होंगे, जो आम आदमी की जेब को सीधी राहत देंगे।

न्यू टैक्स रिजीम पर सरकार का फोकस

पिछले कुछ वर्षों से सरकार का साफ संकेत रहा है कि वह पुराने टैक्स सिस्टम की तुलना में नए टैक्स सिस्टम को ज्यादा सरल और आकर्षक बनाना चाहती है। न्यू टैक्स रिजीम में कम स्लैब, आसान गणना और कम झंझट को प्राथमिकता दी गई है। बजट 2026 में इस दिशा को और मजबूत करने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

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क्यों जरूरी हो गए हैं टैक्स स्लैब में बदलाव

महंगाई लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही सैलरी में भी धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है। लेकिन टैक्स स्लैब लंबे समय तक एक जैसे रहने से लोगों की असली बचत कम हो जाती है। इसे ही ब्रैकेट क्रीप कहा जाता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए बजट 2026 में टैक्स स्लैब में बदलाव की मांग जोर पकड़ रही है।

30 प्रतिशत टैक्स स्लैब को लेकर बड़ी चर्चा

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माना जा रहा है कि बजट 2026 में सबसे बड़ा बदलाव 30 प्रतिशत वाले टैक्स स्लैब में हो सकता है। अभी यह स्लैब अपेक्षाकृत कम आय स्तर पर लागू हो जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सरकार इसकी सीमा को बढ़ाकर 35 लाख रुपये तक कर सकती है। इससे हाई इनकम मिडिल क्लास को सीधा फायदा मिलेगा।

स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने की उम्मीद

न्यू टैक्स रिजीम में फिलहाल नौकरीपेशा लोगों को 75 हजार रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलती है। बजट 2026 में इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये या उससे अधिक किए जाने की चर्चा है। अगर ऐसा होता है, तो टैक्सेबल इनकम अपने आप कम हो जाएगी और लाखों कर्मचारियों की सालाना बचत बढ़ सकती है।

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सेक्शन 87A के तहत राहत की संभावना

कम आय वर्ग के टैक्सपेयर्स के लिए सेक्शन 87A बहुत अहम भूमिका निभाता है। फिलहाल इस रिबेट के कारण एक निश्चित सीमा तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इसे और सरल बना सकती है ताकि कम आय वालों को टैक्स के झंझट से पूरी तरह राहत मिल सके।

न्यू टैक्स रिजीम को डिफॉल्ट बनाने की तैयारी

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सरकार धीरे-धीरे पुराने टैक्स सिस्टम को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बजट 2026 में न्यू टैक्स रिजीम को और मजबूती से डिफॉल्ट विकल्प बनाया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि अगर कोई टैक्सपेयर अलग से विकल्प नहीं चुनता, तो वह अपने आप नए सिस्टम के तहत आ जाएगा।

वर्तमान टैक्स फ्री आय सीमा और संभावित बदलाव

इस समय न्यू टैक्स रिजीम में रिबेट और स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलाकर करीब 12.75 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स नहीं लगता। बजट 2026 में इस सीमा को और बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। अनुमान है कि बदलाव के बाद 15 लाख रुपये तक कमाने वालों को भी बहुत मामूली टैक्स देना पड़ेगा।

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एनपीएस को लेकर मिल सकती है नई राहत

न्यू टैक्स रिजीम में अभी निवेश से जुड़े विकल्प सीमित हैं। ऐसे में सरकार एनपीएस यानी नेशनल पेंशन स्कीम को और आकर्षक बना सकती है। एनपीएस में निवेश पर अतिरिक्त टैक्स छूट मिलने से लोग रिटायरमेंट प्लानिंग के साथ-साथ टैक्स बचत का भी लाभ उठा सकेंगे।

होम लोन और मिडिल क्लास की उम्मीदें

घर खरीदने वाले लोगों के लिए टैक्स में राहत हमेशा बड़ा मुद्दा रहा है। पुराने टैक्स सिस्टम में होम लोन के ब्याज पर छूट मिलती थी, लेकिन नए सिस्टम में यह सुविधा नहीं है। बजट 2026 में सरकार इस पर पुनर्विचार कर सकती है या नई व्यवस्था के तहत कोई वैकल्पिक राहत दे सकती है।

सरल आईटीआर फॉर्म की योजना

सरकार टैक्स फाइलिंग को भी आसान बनाना चाहती है। बजट 2026 में “वन नेशन-वन आईटीआर” जैसी व्यवस्था लाने की चर्चा है। इससे टैक्स रिटर्न भरना और भी सरल हो जाएगा और आम लोगों को चार्टर्ड अकाउंटेंट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर राहत की उम्मीद

स्वास्थ्य बीमा आज हर परिवार की जरूरत बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर लगने वाली जीएसटी दरों में कटौती कर सकती है। इससे लोगों को बेहतर बीमा कवर लेने में आसानी होगी और स्वास्थ्य खर्च का बोझ कम होगा।

न्यू टैक्स बनाम ओल्ड टैक्स सिस्टम

बजट 2026 में न्यू टैक्स रिजीम को पुराने सिस्टम से ज्यादा आकर्षक बनाने की कोशिश होगी। जहां पुराने सिस्टम में छूट और निवेश की शर्तें ज्यादा हैं, वहीं नया सिस्टम सरलता पर आधारित है। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग नए सिस्टम को अपनाएं।

आठवें वेतन आयोग से पहले बदलाव क्यों जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में आठवां वेतन आयोग लागू हो सकता है। इससे सैलरी में बड़ा इजाफा होगा। अगर टैक्स स्लैब पहले से अपडेट नहीं किए गए, तो कर्मचारियों पर टैक्स का बोझ अचानक बढ़ सकता है। इसलिए बजट 2026 में बदलाव को जरूरी माना जा रहा है।

अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सकारात्मक असर

अगर टैक्स में राहत मिलती है, तो लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बचेगा। इससे बाजार में मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। सरकार भी इसी सोच के साथ मिडिल क्लास को राहत देने की योजना बना रही है।

बजट 2026 से टैक्सपेयर्स को बड़ी उम्मीदें हैं, खासकर न्यू टैक्स रिजीम को लेकर। अगर स्टैंडर्ड डिडक्शन, टैक्स स्लैब और रिबेट में बदलाव होते हैं, तो यह मिडिल क्लास के लिए ऐतिहासिक बजट साबित हो सकता है। अब सभी की नजरें 1 फरवरी 2026 पर टिकी हैं।

डिस्क्लेमर

यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स, टैक्स विशेषज्ञों की राय और पिछले बजट के रुझानों पर आधारित है। बजट 2026 से जुड़े सभी बदलाव तभी मान्य होंगे जब उनकी आधिकारिक घोषणा वित्त मंत्री द्वारा की जाएगी। टैक्स से संबंधित कोई भी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक अधिसूचना और विशेषज्ञ सलाह अवश्य लें।

Meera Sharma

Meera Sharma is a talented writer and editor at a top news portal, shining with her concise takes on government schemes, news, tech, and automobiles. Her engaging style and sharp insights make her a beloved voice in journalism.

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